सहयोग पोर्टल
केंद्र के सहयोग (Sahyog) पोर्टल को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा गृह मंत्रालय के सहयोग से विकसित इस पोर्टल को 2024 में आईटी अधिनियम, 2000 के तहत ऑनलाइन “आपत्तिजनक सामग्री” को तेजी से ब्लॉक करने के लिए लॉन्च किया गया था। इस वेबसाइट का उद्देश्य सभी अधिकृत एजेंसियों और मध्यवर्तियों (intermediaries) को एक ही मंच पर लाना था, जिससे अवैध ऑनलाइन सामग्री के खिलाफ तत्काल कार्रवाई को सक्षम और स्वचालित (automated) बनाया जा सके।
यह पहली बार नहीं है जब सहयोग पोर्टल को अदालत में चुनौती दी गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) ने इससे पहले इस पोर्टल के खिलाफ कर्नाटक उच्च न्यायालय का रुख किया था। कर्नाटक हाई कोर्ट की एकल न्यायाधीश पीठ ने सितंबर 2025 में इसकी वैधता को बरकरार रखा था। X की अपील वहां एक खंडपीठ (दो न्यायाधीशों की पीठ) के समक्ष लंबित है।
अक्टूबर 2025 में, केंद्र सरकार ने आईटी नियमों के नियम 3(1)(d) में एक संशोधन अधिसूचित किया। इसके तहत मध्यवर्तियों के लिए “वास्तविक जानकारी” (actual knowledge) मिलने पर 36 घंटों के भीतर अवैध कार्यों के लिए उपयोग की जाने वाली सूचना तक पहुंच को हटाना या अक्षम करना अनिवार्य कर दिया गया। संशोधित नियम 15 नवंबर, 2025 से प्रभावी हुआ। सरकार के अनुसार, इसने यह सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय पेश किए हैं कि मध्यवर्ती “पारदर्शी, आनुपातिक और जवाबदेह तरीके” से अवैध सामग्री को हटाएं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये विवादित निर्णय अनुच्छेद 19(1)(g) (किसी भी पेशे का अभ्यास करने या किसी भी व्यवसाय, व्यापार या व्यापार को करने का अधिकार) और अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हैं।
प्रमुख कानूनी बिंदु (Key Legal Points):
- समय सीमा: आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के लिए अब केवल 36 घंटे का समय दिया गया है।
- संवैधानिक चुनौती: मामला मुख्य रूप से व्यावसायिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार के इर्द-गिर्द घूम रहा है।


