केंद्र ने अरावली रेंज में किसी भी नई माइनिंग लीज़ देने पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए राज्यों को निर्देश जारी किए

केंद्र सरकार ने अवैध खनन के खिलाफ और पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अरावली पर्वत श्रृंखला में नई खनन लीज देने पर पूरी तरह से रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। यह निर्देश दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात राज्यों के लिए प्रभावी होंगे।

सरकार की प्रतिबद्धता: 90% क्षेत्र अब सुरक्षित

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने अरावली के संरक्षण उपायों को कमजोर करने वाली खबरों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार इस नाजुक इकोसिस्टम के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मंत्री ने बताया कि दिल्ली से गुजरात तक फैली इस श्रृंखला का लगभग 90% क्षेत्र पहले से ही संरक्षित है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और नई परिभाषा का आधार

इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन (ICFRE) द्वारा ‘सस्टेनेबल माइनिंग’ के लिए मैनेजमेंट प्लान तैयार होने तक, सुप्रीम कोर्ट ने नई खनन लीज पर रोक लगा दी है। इसके अनुपालन में, MoEF&CC समिति ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर राजस्थान के पुराने मानदंडों (9 जनवरी 2006) को अपनाया है, जो 2002 के रिचर्ड मर्फी लैंडफॉर्म वर्गीकरण पर आधारित हैं:

  • पहाड़ की परिभाषा: ऐसी भू-आकृतियाँ जो स्थानीय उच्चावाच (local relief) से 100 मीटर ऊपर उठती हैं।
  • बफर जोन: ऐसी दो पहाड़ियों के 500 मीटर के भीतर की भू-आकृतियों को भी खनन गतिविधियों से बाहर रखा गया है।

एक अरब साल पुरानी ‘प्राकृतिक ढाल’

अरावली दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जिसका निर्माण एक अरब साल पहले प्रीकैम्ब्रियन युग के दौरान टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने से हुआ था।

  • विस्तार: यह 700 किमी लंबी श्रृंखला 4 राज्यों और 37 जिलों में फैली है, जिसमें से 560 किमी क्षेत्र अकेले राजस्थान में है।
  • रेगिस्तान पर लगाम: यह श्रृंखला पश्चिम से थार रेगिस्तान की रेत को उत्तरी मैदानों की ओर बढ़ने से रोकने के लिए एक ‘प्राकृतिक ढाल’ का काम करती है।

दिल्ली-NCR के लिए जीवनरेखा

अरावली केवल भूगोल नहीं, बल्कि दिल्ली-NCR के लिए पर्यावरण की रक्षा कवच है। यह क्षेत्र की वायु गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करती है और प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि इन पहाड़ियों का क्षरण होता है, तो दिल्ली-NCR में रेत का अतिक्रमण बढ़ जाएगा, जिसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं। इसके अलावा, ये पहाड़ अच्छी बारिश लाने और क्षेत्र के जल स्तर (Groundwater) को बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य हैं।

जैव विविधता का खजाना और टाइगर रिजर्व

अरावली का परिदृश्य अद्वितीय शुष्क और अर्ध-शुष्क वनस्पतियों तथा जीवों का घर है।

  • इस रेंज में कुल 22 वन्यजीव अभयारण्य (Wild Life Sanctuaries) हैं, जिनमें से 16 राजस्थान में स्थित हैं।
  • भारत के तीन प्रमुख टाइगर रिजर्व— रणथंभौर, सरिस्का और मुकुंदरा— इसी पारिस्थितिक तंत्र का हिस्सा हैं।
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