पानी के नीचे देश की पहली दोहरी ट्यूब सड़क-सह-रेल सुरंग परियोजना
भारत सरकार ने असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे देश की पहली पानी के भीतर जुड़वां ट्यूब सड़क-सह-रेल सुरंग परियोजना (country’s first underwater twin tube road-cum-rail tunnel project) के निर्माण को मंजूरी दे दी है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दिखाई है।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
- लंबाई और स्वरूप: यह 33.7 किलोमीटर लंबी, चार-लेन वाली एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी परियोजना है। इसमें नदी के नीचे 15.79 किलोमीटर लंबी जुड़वां ट्यूब सुरंग शामिल होगी।
- लागत: इस बुनियादी ढांचा परियोजना का विकास 18,662 करोड़ रुपये की लागत से ‘इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन’ (EPC) मोड में किया जाएगा।
- कनेक्टिविटी: यह मार्ग असम में NH-15 पर स्थित गोहपुर और NH-715 पर स्थित नुमालीगढ़ को जोड़ेगा।
क्रांतिकारी बदलाव: समय और दूरी की बचत
| विवरण | वर्तमान स्थिति | परियोजना के बाद |
| दूरी | 240 किलोमीटर | मात्र 34 किलोमीटर |
| यात्रा का समय | 6 घंटे | मात्र 20 मिनट |
रणनीतिक और आर्थिक महत्व
यह दुनिया की दूसरी पानी के भीतर सड़क-सह-रेल सुरंग होगी। इसके लाभ केवल असम तक सीमित नहीं रहेंगे:
- पूर्वोत्तर राज्यों को लाभ: असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के लिए यह वरदान साबित होगी।
- लॉजिस्टिक्स: माल ढुलाई की दक्षता बढ़ेगी और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी।
- रोजगार: इससे लगभग 80 लाख मैन-डेज़ (person-days) का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होगा।
- रणनीतिक भूमिका: यह प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच संपर्क मजबूत करेगी और व्यापार के नए रास्ते खोलेगी।
EPC मॉडल क्या है?
इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन (EPC) एक ऐसा अनुबंध है जिसमें ठेकेदार या कंपनी को शुरू से अंत तक परियोजना पूरी करने की जिम्मेदारी दी जाती है।
- मुख्य जिम्मेदारियां: इसमें इंजीनियरिंग, खरीद (Procurement) और निर्माण (Construction) की पूरी जवाबदेही एक ही ठेकेदार की होती है।
- LSTK (Lump Sum Turnkey): इसे ‘एकमुश्त टर्नकी’ अनुबंध भी कहा जाता है, जहाँ ठेकेदार एक निश्चित कीमत पर परियोजना पूरी करने के लिए सहमत होता है।
- फायदा: पारंपरिक मॉडलों के विपरीत (जहाँ कई अलग-अलग ठेकेदार होते हैं), EPC मॉडल बेहतर समन्वय, समय की बचत और लागत दक्षता सुनिश्चित करता है। इससे विवाद की संभावना कम हो जाती है क्योंकि पूरी निर्माण प्रक्रिया के लिए एक ही इकाई जिम्मेदार होती है।


