कैंडिडा ऑरिस क्या है?
भारतीय शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए एक नए अध्ययन ने वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। अध्ययन के अनुसार, दवा प्रतिरोधी फंगल प्रजाति कैंडिडा ऑरिस (Candida auris) न केवल दुनिया भर में तेजी से फैल रही है, बल्कि यह पहले से कहीं अधिक जानलेवा और चालाक होती जा रही है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी और अमेरिका का संयुक्त शोध
यह अध्ययन दिल्ली यूनिवर्सिटी के वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट (VPCI) के शोधकर्ताओं और अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की एक टीम द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। शोध के परिणाम प्रतिष्ठित जर्नल ‘माइक्रोबायोलॉजी एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी रिव्यूज़’ में प्रकाशित हुए हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि इनवेसिव फंगल इन्फेक्शन अब एक वैश्विक संकट का रूप ले रहे हैं।
50% से अधिक है मृत्यु दर
अध्ययन में सामने आए आंकड़े डराने वाले हैं:
- सालाना प्रभाव: दुनिया भर में हर साल लगभग 6.5 मिलियन (65 लाख) लोग इनवेसिव फंगल इन्फेक्शन की चपेट में आ रहे हैं।
- उच्च मृत्यु दर: एंटीफंगल थेरेपी और इलाज के बावजूद, इस संक्रमण से होने वाली मृत्यु दर 50 प्रतिशत से भी अधिक हो सकती है।
- त्वचा पर पकड़: इस पैथोजन में इंसानी त्वचा पर पनपने और लंबे समय तक बने रहने की एक अनूठी क्षमता है, जिससे यह अस्पतालों में तेजी से फैलता है।
जीवित रहने के लिए ‘चालाक’ रणनीतियां
शोधकर्ताओं ने सी. ऑरिस (C. auris) को ‘चालाक’ पैथोजन बताया है क्योंकि इसने खुद को बचाने के लिए उन्नत सेलुलर रणनीतियां विकसित कर ली हैं:
- मॉर्फोजेनेसिस (Morphogenesis): यह फंगस जरूरत पड़ने पर अपनी बनावट बदल सकता है (यीस्ट ग्रोथ से फिलामेंट-संचालित प्रसार में बदलना)।
- मल्टीसेल्यूलर एग्रीगेट: यह आपस में जुड़कर कोशिकाओं का समूह बना लेता है, जिससे दवाओं का असर कम हो जाता है।
- जेनेटिक अनुकूलन: बदलते माहौल और दवाओं के हमले के जवाब में यह अपने फेनोटाइपिक जेनेटिक एक्सप्रेशन को बदलने में सक्षम है।
मल्टीड्रग-प्रतिरोधी क्षमता बनी चुनौती
कैंडिडा ऑरिस की सबसे बड़ी चिंता इसकी मल्टीड्रग-प्रतिरोधी (Multidrug-resistant) प्रकृति है। इसका अर्थ है कि इस पर बाजार में उपलब्ध कई सामान्य एंटीफंगल दवाएं बेअसर साबित हो रही हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि अस्पताल के वातावरण में इसकी मौजूदगी और संक्रमण फैलने की क्षमता इसे भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा बनाती है।


