मदुरई को मिला अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च को तमिलनाडु के मदुरई/मदुरै हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित करने की मंजूरी दे दी है। राज्य के सबसे पुराने हवाई अड्डों में से एक होने के नाते, यह दक्षिणी तमिलनाडु के लिए एक प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है।

इस निर्णय के लाभ:

  • क्षेत्रीय संपर्क: अंतर्राष्ट्रीय दर्जा मिलने से दक्षिणी जिलों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
  • आर्थिक विकास: इससे पर्यटन, तीर्थयात्रा और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
  • यात्री यातायात: यह कदम अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों की संख्या बढ़ाने और आगंतुकों के लिए यात्रा को आसान बनाने में मदद करेगा।

मदुरई: “पूरब का एथेंस” और सांस्कृतिक विरासत

मदुरई को अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता के कारण कई उपनामों से जाना जाता है।

ऐतिहासिक महत्व:

  • संगम युग: यह संगम काल से ही तमिल सभ्यता का प्रमुख केंद्र और शिक्षा का स्थान रहा है।
  • विदेशी संपर्क: तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में मेगास्थनीज ने मदुरै की यात्रा की थी। बाद में रोम और ग्रीस के व्यापारियों ने पांड्य राजाओं के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित किए।
  • ऐतिहासिक संघर्ष: 10वीं शताब्दी में चोल शासकों ने इस पर कब्जा कर लिया था। 1311 में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति मालिक काफूर ने यहाँ लूटपाट की थी।
  • साहित्य: महान तमिल महाकाव्य “शिलप्पादिकारम” कन्नगी की कहानी पर आधारित है, जिन्होंने अपने पति कोवलन के साथ हुए अन्याय के प्रतिशोध में मदुरई को जला दिया था।

शहर की विशेषताएं:

  • मंदिरों का शहर: शहर के क्षितिज पर मीनाक्षी अम्मन मंदिर के ऊंचे गोपुरमों का दबदबा है।
  • भौगोलिक सीमा: मदुरई शहर की सीमा तीन पहाड़ियों से घिरी है:
    1. आनाइमलाई (Yanaimalai): हाथी के समान।
    2. नागमलाई (Nagamalai): सांप के समान।
    3. पशुमलाई (Pasumalai): गाय के समान।
  • प्रसिद्ध उत्पाद: यह शहर अपनी चमेली के फूलों (मदुरई मल्ली) के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
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