कैबिनेट ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंज़ूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इस विस्तार के साथ न केवल बजट में भारी बढ़ोतरी की गई है, बल्कि ग्रामीण जल आपूर्ति को केवल बुनियादी ढांचे (Infrastructure) से बदलकर एक ‘नागरिक-केंद्रित उपयोगिता मॉडल’ (Citizen-centric Utility Model) बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

1. बजट और वित्तीय आवंटन

सरकार ने मिशन के कुल परिव्यय (Outlay) को बढ़ाकर ₹8.69 लाख करोड़ कर दिया है।

  • केंद्रीय सहायता: ₹3.59 लाख करोड़ (2019 के ₹2.08 लाख करोड़ से काफी अधिक)।
  • अतिरिक्त केंद्रीय हिस्सा: ₹1.51 लाख करोड़ की वृद्धि की गई है।

2. मुख्य सुधार और नई पहल

मिशन के दूसरे चरण में सेवा वितरण और जवाबदेही पर जोर देने के लिए कई नई प्रणालियाँ शुरू की गई हैं:

  • “सुजलम भारत” (Sujalam Bharat): एक राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा, जो प्रत्येक गाँव को एक विशिष्ट ‘सुजल गाँव’ या ‘सर्विस एरिया आईडी’ प्रदान करेगा। यह स्रोत से लेकर घर के नल तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला की डिजिटल मैपिंग करेगा।
  • “जल अर्पण” (Jal Arpan): इसके माध्यम से ग्राम पंचायतें और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियां (VWSCs) जल योजनाओं के संचालन और हस्तांतरण में औपचारिक रूप से भाग लेंगी।
  • “जल उत्सव” (Jal Utsav): जल बुनियादी ढांचे के रखरखाव की समीक्षा करने और सामूहिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देने के लिए एक वार्षिक सामुदायिक कार्यक्रम।
  • प्रमाणन नियम: अब कोई भी ग्राम पंचायत खुद को “हर घर जल” तभी घोषित कर पाएगी, जब वह प्रमाणित करेगी कि वहां संचालन और रखरखाव (O&M) की पर्याप्त व्यवस्था है।

3. अब तक की प्रगति और लक्ष्य

2019 में मिशन की शुरुआत से लेकर अब तक ग्रामीण भारत में पानी के कनेक्शन की स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव आया है:

विवरण2019 (शुरुआत)वर्तमान स्थिति (2026)लक्ष्य (दिसंबर 2028)
नल कनेक्शन वाले घर3.23 करोड़ (17%)15.80 करोड़ (81.6%)19.36 करोड़ (100%)
अतिरिक्त कनेक्शन12.56 करोड़सभी शेष परिवार

निष्कर्ष

जल जीवन मिशन 2.0 का उद्देश्य केवल पाइप बिछाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि पानी की आपूर्ति स्थायी और दीर्घकालिक हो। डिजिटल निगरानी और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सरकार ग्रामीण भारत में जल सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहती है।

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