प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों में ढील: प्रेस नोट 3 में संशोधन
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च को प्रेस नोट 3 (2020) में बदलावों को मंजूरी दे दी है। इसके तहत भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों (LBC) से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को सरल बनाया गया है।
मुख्य संशोधन:
- 10% की सीमा और ऑटोमैटिक रूट: ऐसे निवेशक जिनकी ‘बेनिफिशियल ओनरशिप’ (लाभकारी स्वामित्व) 10% तक है और जिनका कंपनी पर नियंत्रण (non-controlling) नहीं है, उन्हें अब ऑटोमैटिक रूट के तहत निवेश की अनुमति होगी। इसके लिए संबंधित क्षेत्रीय सीमा (sectoral caps) और शर्तों का पालन करना होगा।
- रिपोर्टिंग की अनिवार्यता: इस तरह के निवेश के लिए निवेश प्राप्त करने वाली भारतीय इकाई (investee entity) को ‘उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग’ (DPIIT) को प्रासंगिक जानकारी और विवरण की रिपोर्ट देनी होगी।
- बेनिफिशियल ओनरशिप (Beneficial Ownership): संशोधन में अब ‘लाभकारी स्वामित्व’ का प्रावधान शामिल किया गया है। यह स्पष्ट किया गया है कि इन देशों की वे कंपनियाँ, जिनकी हिस्सेदारी नियंत्रित करने वाली नहीं है, भारत सरकार की पूर्व अनुमति के बिना निवेश कर सकती हैं।
- नोट: ‘बेनिफिशियल ओनरशिप’ शब्द का व्यापक रूप से निवेश समुदाय द्वारा ‘धन शोधन निवारण नियम (PML Rules), 2005’ के तहत उपयोग किया जाता है।
विनिर्माण क्षेत्रों के लिए समय सीमा:
पूंजीगत सामान (capital goods), इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जे, पॉलीसिल्कॉन और इनगॉट-वेफर जैसे विशिष्ट विनिर्माण क्षेत्रों में निवेश के प्रस्तावों पर अब 60 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाएगा।
पृष्ठभूमि: प्रेस नोट 3 का नियम क्या था?
- अनिवार्य मंजूरी: अप्रैल 2020 में जारी मूल नियम (प्रेस नोट 3) के अनुसार, चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान जैसे देशों के शेयरधारकों वाली विदेशी कंपनियों को भारत के किसी भी क्षेत्र में निवेश करने के लिए सरकार से अनिवार्य मंजूरी लेना आवश्यक था।
- बदलाव का उद्देश्य: 2020 से पहले, अधिकांश सेक्टर्स में ‘ऑटोमैटिक रूट’ से निवेश की अनुमति थी। प्रेस नोट 3 ने इन निवेशों को ‘सरकारी रूट’ में स्थानांतरित कर दिया था, जिससे केंद्र सरकार की मंजूरी अनिवार्य हो गई थी।


