चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) कार्यक्रम

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन के क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।


चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) कार्यक्रम: एक नजर में

यह 2022 में शुरू किया गया एक व्यापक क्षमता निर्माण कार्यक्रम है, जिसके लिए पांच वर्षों के लिए ₹250 करोड़ का बजट रखा गया है। इसके तहत लगभग 400 संस्थान जुड़े हैं (305 शैक्षणिक संस्थान और 95 स्टार्टअप)।

मुख्य लक्ष्य (Key Targets):

  • हुनरमंद कार्यबल: स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर 85,000 पेशेवर तैयार करना।
  • स्टार्टअप को बढ़ावा: 25 नए स्टार्टअप्स का इनक्यूबेशन करना और 10 तकनीकों का हस्तांतरण (Technology Transfer) सुनिश्चित करना।
  • अनुसंधान और पेटेंट: एक लाख छात्रों को प्रशिक्षित करना, 50 पेटेंट हासिल करना और कम से कम 2,000 शोध पत्र प्रकाशित करना।

प्रमुख सुविधाएं और बुनियादी ढांचा

  • ChipIN सेंटर (C-DAC बेंगलुरु): यह भारत की सबसे बड़ी सुविधाओं में से एक है। यह छात्रों और स्टार्टअप्स को चिप डिजाइन के आधुनिक टूल्स, हार्डवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी सलाह (Mentorship) एक ही जगह उपलब्ध कराता है।
  • प्रैक्टिकल अनुभव: C2S कार्यक्रम छात्रों को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि चिप की डिजाइनिंग, फैब्रिकेशन (बनावट) और टेस्टिंग का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करता है।
  • SCL मोहाली की भूमिका: मोहाली स्थित सेमी-कंडक्टर लेबोरेटरी (SCL), छात्रों और शोधकर्ताओं द्वारा डिजाइन की गई चिप्स को हकीकत में बनाने (Fabrication) की सुविधा देती है।

डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना

C2S के साथ-साथ, DLI योजना के तहत 95 स्टार्टअप्स को आर्थिक और तकनीकी सहायता दी जा रही है ताकि भारत में बने चिप डिजाइन को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल सके।


महत्व: यह पहल भारत को केवल चिप आयात करने वाला देश नहीं, बल्कि खुद की चिप डिजाइन करने वाला और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर देश बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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