बायोफार्मा शक्ति (Biopharma SHAKTI)

केंद्रीय बजट 2026-27 भारत के फार्मास्युटिकल दृष्टिकोण में एक निर्णायक बदलाव का संकेत देता है, जिसमें बायोफार्मा और बायोलॉजिक दवाओं को स्वास्थ्य सेवा और विनिर्माण रणनीति के केंद्र में रखा गया है। यह भारत को एक अग्रणी वैश्विक बायोफार्मा उद्योग में बदलने और वैश्विक बाजार में 5% हिस्सेदारी हासिल करने के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

मुख्य घोषणाएं:

  • बायोफार्मा शक्ति (Biopharma SHAKTI): पांच वर्षों के लिए ₹10,000 करोड़ के परिव्यय के साथ इस योजना का प्रस्ताव दिया गया है। इसका उद्देश्य बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर के उत्पादन के लिए पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।
  • लक्ष्य: उच्च मूल्य वाले बायोफार्मास्युटिकल उत्पादों के घरेलू विकास को समर्थन देना, आयात पर निर्भरता कम करना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना।
  • संस्थागत विस्तार: तीन नए NIPERs (राष्ट्रीय औषधि शिक्षा और अनुसंधान संस्थान) की स्थापना और सात मौजूदा NIPERs का उन्नयन (Upgradation) किया जाएगा।

बायोफार्मा (Biopharmaceuticals) क्या है?

बायोफार्मा दवा उद्योग का वह हिस्सा है जो केवल रासायनिक संश्लेषण (Chemical Synthesis) के बजाय जीवित जैविक प्रणालियों का उपयोग करके दवाएं विकसित और निर्मित करता है।

  • प्रक्रिया: ये दवाएं कोशिकाओं, सूक्ष्मजीवों (Microorganisms), बैक्टीरिया या कवक (Fungi) जैसे जैविक प्लेटफार्मों के माध्यम से तैयार की जाती हैं।
  • विशेषता: जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) का उपयोग करके, इन जीवित प्रणालियों को ऐसी दवाएं बनाने के लिए निर्देशित किया जाता है जो बीमारी को रोक सकती हैं या उसका इलाज कर सकती हैं।
  • सटीकता: चूंकि ये जैविक प्रक्रियाओं से बनती हैं, इसलिए ये पारंपरिक दवाओं की तुलना में अधिक जटिल और लक्षित (Targeted) होती हैं, जिससे वे शरीर के भीतर अधिक सटीक तरीके से काम कर पाती हैं।
  • उदाहरण: टीके (Vaccines), चिकित्सीय प्रोटीन, बायोसिमिलर और अन्य उन्नत बायोलॉजिक उपचार इसके अंतर्गत आते हैं।

राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (NBM)

मई 2017 में ‘इन्नोवेट इन इंडिया (i3)’ के साथ शुरू किए गए इस मिशन का लक्ष्य भारत को 2025 तक 100 अरब डॉलर के अग्रणी वैश्विक बायोटेक उद्योग में बदलना था। बजट 2026-27 इसी नींव को और अधिक विस्तार देता है।

error: Content is protected !!