गणतंत्र दिवस परेड में दिखे बैक्ट्रियन ऊंट
नई दिल्ली: इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह में लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान से आए दो विशेष मेहमानों— ‘गलवान’ और ‘नुब्रा’ — ने दर्शकों का मन मोह लिया। इन बैक्ट्रियन ऊंटों (Camelus bactrianus) का नाम लद्दाख के उन रणनीतिक क्षेत्रों के नाम पर रखा गया है, जो भारत में इस प्रजाति का एकमात्र निवास स्थान हैं।
मशीनी युग में भी ‘साइलेंट वॉरियर्स’ की अहमियत
आज के ड्रोन और रोबोटिक्स के युग में भी, ऊंट जैसे बोझा ढोने वाले जानवरों (Pack animals) की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है। भारतीय सेना ने इन्हें विशेष रूप से दुर्गम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रसद पहुंचाने के लिए शामिल किया है, जहाँ अक्सर भारी मशीनें और वाहन विफल हो जाते हैं।
बैक्ट्रियन बनाम ड्रोमेडरी: अंतर समझें
ऊंटों के बड़े परिवार (Camelids) में वर्तमान में तीन वंश और सात प्रजातियां शामिल हैं:
- बैक्ट्रियन ऊंट (Bactrian): इनके पीठ पर दो कूबड़ होते हैं। ये मुख्य रूप से मध्य एशिया और भारत के लद्दाख क्षेत्र में पाए जाते हैं।
- ड्रोमेडरी ऊंट (Dromedary): इन्हें ‘अरबियन ऊंट’ भी कहा जाता है और इनके एक कूबड़ होता है। भारत में ये राजस्थान और गुजरात जैसे उत्तर-पश्चिमी राज्यों में पाए जाते हैं।
वैज्ञानिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण
- आनुवंशिक खोज: हालिया आनुवंशिक अध्ययनों ने यह सिद्ध किया है कि जंगली ऊंट (Camelus ferus), जिसे लंबे समय तक बैक्ट्रियन का पूर्वज माना जाता था, वास्तव में एक अलग प्रजाति है। इनका जीनोटाइप पूरी तरह भिन्न है।
- नाम का इतिहास: “बैक्ट्रियन” नाम मध्य एशिया के प्राचीन बैक्ट्रिया क्षेत्र से आया है, जिसे आज उत्तरी अफगानिस्तान के ‘बल्ख’ के रूप में जाना जाता है।
- प्राचीन भारत से संबंध: संस्कृत के प्राचीन ग्रंथों में इस क्षेत्र का उल्लेख ‘बाह्लिक’ (Bahlika) या ‘तुषार/तुखार’ (Tushara/Tukhara) के रूप में मिलता है। मध्यकाल में इसे ‘तोखारिस्तान’ भी कहा गया।
विशेषताएं एक नजर में
| विशेषता | बैक्ट्रियन ऊंट (लद्दाख) | ड्रोमेडरी ऊंट (राजस्थान) |
| कूबड़ | दो (वसा भंडारण के लिए) | एक |
| सहनशक्ति | -30°C की अत्यधिक ठंड | 50°C की अत्यधिक गर्मी |
| ऊंचाई पर क्षमता | 15,000 फीट से अधिक | मुख्य रूप से मैदानी/रेगिस्तानी |


