DRDO ने आकाश-NG के यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल (UET) को सफलतापूर्वक पूरा किया
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने आकाश-न्यू जेनरेशन (Akash-NG) मिसाइल प्रणाली के यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल (UET) को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस सफलता के साथ ही अब इस आधुनिक मिसाइल प्रणाली के भारतीय वायु सेना (IAF) में शामिल होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
हवाई खतरों के खिलाफ अभेद्य कवच
आकाश-NG को विशेष रूप से भारतीय वायु सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इसकी मुख्य विशेषता उन हवाई खतरों को रोकना है जो:
- तेजी से दिशा बदलने (High Maneuvering) में सक्षम हैं।
- जिनका रडार क्रॉस सेक्शन (RCS) बहुत कम होता है, जिससे उन्हें सामान्य रडार से पकड़ना मुश्किल होता है।
डॉ. कलाम की विरासत: IGMDP का हिस्सा
आकाश एक लघु से मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली (SAM) मिसाइल है। इसकी विकास यात्रा 1980 के दशक के अंत में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में शुरू हुए एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) के साथ शुरू हुई थी। आज यह मिसाइल भारत के ‘आकाश’ में प्रतिरोध और सुरक्षा का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुकी है।
अचूक मारक क्षमता और तकनीकी विशेषताएँ
आकाश हथियार प्रणाली कई एडवांस फीचर्स से लैस है जो इसे दुनिया की बेहतरीन मिसाइलों की श्रेणी में खड़ा करते हैं:
- मल्टी-टारगेट क्षमता: यह सिस्टम एक साथ कई लक्ष्यों को ‘ग्रुप मोड’ या ‘ऑटोनॉमस मोड’ में निशाना बना सकता है।
- ECCM तकनीक: इसमें बिल्ट-इन इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटर मेजर्स (ECCM) की सुविधा है, जो दुश्मन के उन सिस्टम को विफल कर देती है जो रडार को धोखा देने की कोशिश करते हैं।
- आत्मनिर्भर भारत: DRDO के अनुसार, आकाश मिसाइल में 96% स्वदेशी कंपोनेंट का उपयोग किया गया है।
सेना और वायु सेना में सेवा का गौरव
आकाश मिसाइल को साल 2014 में वायु सेना और 2015 में भारतीय सेना में शामिल किया गया था। वर्तमान में सेना और वायु सेना दोनों ही इसके कई स्क्वाड्रन और ग्रुप का संचालन कर रहे हैं, जो संवेदनशील क्षेत्रों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को सुरक्षा प्रदान करते हैं।
आकाश के विभिन्न वर्जन: ‘NG’ और ‘प्राइम’
DRDO ने बदलती चुनौतियों को देखते हुए इसके नए वर्जन विकसित किए हैं:
- आकाश-NG: आधुनिक और तेज हवाई खतरों से निपटने के लिए नई पीढ़ी की मिसाइल।
- आकाश प्राइम: इसमें पहले वाले वर्जन जितनी ही रेंज है, लेकिन लक्ष्य को सटीकता से भेदने के लिए एक नया स्वदेशी एक्टिव रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सीकर जोड़ा गया है।


