‘हाई सीज़ ट्रीटी’ (BBNJ) 17 जनवरी 2026 को लागू हो गई
हाई सीज़ ट्रीटी (High Seas Treaty), जिसे आधिकारिक तौर पर BBNJ (Biodiversity Beyond National Jurisdiction) समझौता कहा जाता है, 17 जनवरी 2026 को दुनिया भर में प्रभावी हो गई है। यह संधि उन समुद्री क्षेत्रों के संरक्षण के लिए बनाई गई है जो किसी भी देश की सीमा (National Waters) से बाहर हैं।
संधि की मुख्य विशेषताएं:
- विशाल क्षेत्र का कवरेज: यह संधि समुद्र की सतह के दो-तिहाई हिस्से और पृथ्वी के कुल रहने योग्य स्थान (Habitat) के 90% से अधिक हिस्से को कवर करती है।
- कानूनी बाध्यता: यह एक लीगली बाइंडिंग (Legally Binding) संधि है, जिसका अर्थ है कि इसे स्वीकार करने वाले 81 देशों के लिए इसके नियमों को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करना अनिवार्य होगा।
- समान अधिकार: इसका उद्देश्य “हाई सीज़” और अंतरराष्ट्रीय समुद्री तल का प्रबंधन पूरी मानवता के लाभ के लिए टिकाऊ तरीके से करना है।
- समावेशी शासन: यह पहली ऐसी संधि है जिसमें स्वदेशी लोगों, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और लैंगिक संतुलन (Gender Balance) पर विशेष प्रावधान किए गए हैं।
इसके तहत क्या-क्या होगा?
- समुद्री संरक्षित क्षेत्र (MPAs): अब खुले समुद्रों में भी संरक्षित क्षेत्र बनाए जा सकेंगे ताकि वहां के जीव-जंतुओं को बचाया जा सके।
- संसाधनों का विनियमन: समुद्री आनुवंशिक संसाधनों (Marine Genetic Resources) के दोहन के लिए नियम तय किए जाएंगे।
- पर्यावरण मूल्यांकन: समुद्र में होने वाली मानवीय गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव का कड़ाई से आकलन होगा।
- तकनीकी सहयोग: विकसित देश क्षमता निर्माण और समुद्री तकनीक के हस्तांतरण के माध्यम से विकासशील देशों की मदद करेंगे।
भारत की भूमिका
भारत ने इस वैश्विक पहल में सक्रिय भूमिका निभाते हुए 2024 में ही इस संधि को अपना लिया था। $19 बिलियन के निर्यात के साथ एक प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्था होने के नाते, भारत के लिए समुद्री संसाधनों का सतत प्रबंधन और तकनीक हस्तांतरण बेहद महत्वपूर्ण है।
संधि का आधार
यह समझौता 1994 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) पर आधारित है, जिसे “महासागरों का संविधान” भी कहा जाता है। BBNJ इसी ढांचे को और मजबूती प्रदान करता है।


