कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पास ‘डस्की ईगल आउल’ जोड़े को देखा गया

उत्तराखंड के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से सटे तराई पश्चिमी वन प्रभाग के फाटो (Phato) पर्यटन क्षेत्र में डस्की ईगल आउल (Dusky Eagle Owl) के एक दुर्लभ जोड़े को देखा गया है। इस घटना को वन्यजीव विशेषज्ञों द्वारा एक मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि अपनी अत्यधिक मायावी प्रकृति के लिए जानी जाने वाली यह प्रजाति इस क्षेत्र में पिछली बार 15 साल पहले, यानी 2010 में आधिकारिक तौर पर दर्ज की गई थी।

प्रकृतिवादी हिमांशु तिरुवा द्वारा इस दुर्लभ जोड़े के साक्ष्य जुटाए गए हैं। डस्की ईगल आउल छलावरण (Camouflage) की कला में माहिर होते हैं और मानवीय उपस्थिति के प्रति बेहद सतर्क रहते हैं।

पर्यावरण संतुलन का प्रतीक

वन अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस शिकारी पक्षी (Raptor) की वापसी स्थानीय पर्यावरण के स्थिर होने का संकेत देती है।

  • प्राकृतिक आवास: यह उल्लू आमतौर पर नदियों के किनारे घने जंगलों और पुराने पेड़ों में निवास करता है।
  • आहार: यह मुख्य रूप से छोटे स्तनधारियों और पक्षियों का शिकार करता है।
  • व्यवहार: अन्य उल्लुओं के विपरीत, डस्की ईगल आउल बादल वाले मौसम में दिन के समय भी सक्रिय रहता है।

तराई क्षेत्र की पक्षी संपदा

कॉर्बेट के आसपास का तराई क्षेत्र हालांकि बाघों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन डस्की ईगल आउल की इस उपस्थिति ने यहाँ की समृद्ध पक्षी विविधता (Avian Wealth) की ओर दुनिया का ध्यान खींचा है। यह शक्तिशाली पक्षी पारिस्थितिकी तंत्र में ‘टॉप प्रीडेटर’ की भूमिका निभाता है, जो चूहों और अन्य छोटे जीवों की आबादी को नियंत्रित रखता है।

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