डिगलीपुर में मड वोल्केनो विस्फोट
अंडमान द्वीप समूह के डिगलीपुर में अचानक एक पंक ज्वालामुखी (Mud Volcano) फट गया। यह उद्गार 8 जनवरी को जोल टेकरी के पास दर्ज किया गया था। डिगलीपुर का यह स्थल इस क्षेत्र की विशिष्ट संरचनाओं में से एक है। हाथीलेवल के पास, यानी डिगलीपुर से 20 किमी की दूरी पर, कीचड़ ज्वालामुखियों की एक पूरी श्रृंखला स्थित है।
पंक ज्वालामुखी क्या हैं?
पंक ज्वालामुखियों को ‘मड डोम्स’ (Mud Domes) भी कहा जाता है। इनका निर्माण कीचड़ के घोल (slurries), पानी और गैसों के निकलने से होता है।
- निर्माण प्रक्रिया: इनके निर्माण में विभिन्न भूगर्भीय प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। ये असली ज्वालामुखियों की तरह पिघली हुई चट्टानें (लावा) नहीं उगलते। इसके बजाय, ये भूमिगत दबाव और तरल पदार्थ की हलचल के कारण धीरे-धीरे कीचड़युक्त सामग्री, गैस और पानी छोड़ते हैं।
- भौगोलिक संबंध: पंक ज्वालामुखी अक्सर पेट्रोलियम भंडार, टेक्टोनिक सबडक्शन जोन (tectonic subduction zones) और जैविक पट्टियों (organic belts) से जुड़े होते हैं।
मुख्य विशेषताएं और अंतर
| विशेषता | पंक ज्वालामुखी (Mud Volcano) | वास्तविक ज्वालामुखी (Igneous Volcano) |
| सामग्री | कीचड़, पानी और गैसें | मैग्मा और लावा |
| तापमान | 2°C से 100°C (काफी कम) | 700°C से 1200°C (अत्यधिक गर्म) |
| गैसें | मुख्य रूप से मीथेन ($CH_4$), कुछ मात्रा में $CO_2$ | सल्फर डाइऑक्साइड, $CO_2$, जलवाष्प |
| आकार | 1 मीटर से 700 मीटर ऊँचा | कई किलोमीटर तक ऊँचा हो सकता है |
भारत में उपस्थिति
भारत में पंक ज्वालामुखी मुख्य रूप से अंडमान द्वीप श्रृंखला में पाए जाते हैं:
- बाराटांग द्वीप: यहाँ भारत का सबसे प्रसिद्ध कीचड़ ज्वालामुखी स्थित है।
- डिगलीपुर (जोल टेकरी): जहाँ हाल ही में उद्गार देखा गया है।
ये ज्वालामुखी ज्यादातर भूमिगत होते हैं, लेकिन कुछ जमीन पर या उसके पास भी पाए जाते हैं। जब झरनों का पानी और कीचड़ आपस में मिल जाते हैं, तो वे एक घोल बनाते हैं जो आंतरिक दबाव के कारण दरारों के माध्यम से ऊपर की ओर धकेला जाता है।


