UN-सामाजिक विकास आयोग के 64वें सत्र (CSocD64)
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में सामाजिक विकास आयोग के 64वें सत्र (CSocD64) में समावेशी और अधिकार-आधारित सामाजिक विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।
भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य देते हुए, उन्होंने कहा कि देश में सामाजिक न्याय और सामाजिक सुरक्षा संवैधानिक गारंटियों में निहित है और ‘विकसित भारत 2047’ के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के अनुरूप है।
सामाजिक विकास आयोग (CSocD) के बारे में
संयुक्त राष्ट्र सामाजिक विकास आयोग (Commission for Social Development: CSocD), संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) के भीतर एक महत्वपूर्ण आयोग है।
प्रमुख जिम्मेदारियाँ और इतिहास:
- सलाहकार भूमिका: इसकी मुख्य जिम्मेदारी सामाजिक विकास के मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र को सलाह देना है।
- कोपेनहेगन घोषणापत्र: 1995 में कोपेनहेगन में हुए ‘सामाजिक विकास के लिए विश्व शिखर सम्मेलन’ के बाद से, यह आयोग ‘कोपेनहेगन घोषणा और कार्य योजना’ के अनुवर्ती (follow-up) और कार्यान्वयन का मुख्य निकाय रहा है।
- स्थापना और नाम परिवर्तन: इसे मूल रूप से ‘सोशल कमीशन’ के रूप में जाना जाता था। इसकी स्थापना 1946 में ECOSOC प्रस्ताव द्वारा की गई थी और 1966 में इसका नाम बदलकर CSocD कर दिया गया।
संगठनात्मक ढांचा और बैठक
| पहलू | विवरण |
| बैठक | हर साल फरवरी में न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में। |
| सदस्य संख्या | शुरुआत में 18 थी, जिसे कई बार बढ़ाया गया। 1996 से अब इसमें 46 सदस्य हैं। |
| मूल संगठन | आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC)। |


