राष्ट्रपति पुतिन ने भारत के साथ ‘RELOS’ समझौते को दी कानूनी मंज़ूरी

भारत और रूस के बीच दशकों पुराने सामरिक संबंधों को और मज़बूती देते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ‘रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ़ लॉजिस्टिक्स सपोर्ट’ (RELOS) समझौते को संघीय कानून के रूप में मंज़ूरी दे दी है। रूसी संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होने के बाद अब यह समझौता दोनों देशों के बीच औपचारिक दस्तावेज़ों के आदान-प्रदान के साथ ही प्रभावी हो जाएगा।

क्या है RELOS और इसके मायने?

RELOS एक ऐसा सैन्य ढाँचा है जो भारत और रूस की सेनाओं के बीच एक-दूसरे के संसाधनों के उपयोग को सरल बनाता है। इसके तहत निम्नलिखित व्यवस्थाएँ की गई हैं:

  • लॉजिस्टिक्स सपोर्ट: दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे को रसद, ईंधन और अन्य आवश्यक सामग्रियां उपलब्ध कराएंगी।
  • युद्धपोतों और विमानों की आवाजाही: भारतीय युद्धपोतों और सैन्य विमानों के लिए रूसी बंदरगाहों और हवाई क्षेत्र (Airspace) का उपयोग करना अब कानूनी रूप से आसान होगा। यही सुविधा रूसी सेना को भारत में भी मिलेगी।
  • मर्मत और रखरखाव: यह समझौता न केवल तैनाती को सुगम बनाता है, बल्कि सैन्य उपकरणों के रख-रखाव और रिपेयरिंग के लिए एक संस्थागत तंत्र प्रदान करता है।

प्रशांत से लेकर आर्कटिक तक भारत की पहुँच

इस समझौते का सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ भारतीय नौसेना और वायुसेना को मिलेगा। भारत अब रूस के सुदूर और महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों का उपयोग कर सकेगा:

  1. व्लादिवोस्तोक (प्रशांत महासागर): यहाँ पहुँच मिलने से भारत की उपस्थिति प्रशांत क्षेत्र में मज़बूत होगी।
  2. मरमंस्क (आर्कटिक क्षेत्र): आर्कटिक के रणनीतिक जलमार्गों में भारत को ईंधन भरने और मरम्मत की सुविधा मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि भारतीय सेना के पास बड़ी संख्या में रूसी मूल (Russian-origin) के उपकरण हैं, इसलिए इन ठिकानों पर मरम्मत और रखरखाव की सुविधा मिलने से सेना की परिचालन तैयारी (Operational Readiness) में भारी सुधार होगा।


अमेरिका के साथ समझौतों जैसा, पर ‘रूसी अंदाज़’ में

RELOS की प्रकृति भारत द्वारा अमेरिका के साथ किए गए ‘फाउंडेशनल एग्रीमेंट्स’ के समान है, जैसे:

  • LEMOA: लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ़ एग्रीमेंट।
  • COMCASA: संचार संगतता और सुरक्षा समझौता।
  • BECA: बुनियादी विनिमय और सहयोग समझौता।

हालाँकि, RELOS को विशेष रूप से भारत-रूस के विशिष्ट संबंधों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह समझौता दर्शाता है कि वैश्विक भू-राजनीति में बदलाव के बावजूद भारत और रूस का सैन्य सहयोग एक नए और आधुनिक स्तर पर पहुँच गया है।

Source: IE

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