संसद द्वारा ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) बिल, 2025’ पारित
संसद द्वारा पारित ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) बिल, 2025’ भारत के बीमा क्षेत्र के इतिहास में एक बड़ा मोड़ है। 18 दिसंबर को पारित यह विधेयक न केवल विदेशी निवेश के दरवाजे पूरी तरह खोलता है, बल्कि पॉलिसीधारकों की सुरक्षा और परिचालन सुगमता (Ease of Doing Business) पर भी केंद्रित है।
यह विधेयक मुख्य रूप से तीन कानूनों—बीमा अधिनियम 1938, LIC अधिनियम 1956 और IRDA अधिनियम 1999 में संशोधन करता है।
1. 100% FDI: वैश्विक पूंजी के लिए खुला रास्ता
सरकार ने बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% कर दिया है।
- उद्देश्य: वैश्विक कंपनियों को भारतीय बाजार में स्वतंत्र रूप से पूंजी लगाने के लिए प्रोत्साहित करना।
- वर्तमान स्थिति: वित्त मंत्री के अनुसार, वर्तमान में केवल 40 कंपनियों में विदेशी निवेश है, और बहुत कम कंपनियों ने 74% की सीमा का लाभ उठाया है। अब कंपनियां बिना किसी भारतीय पार्टनर के इंतजार के विस्तार कर सकेंगी।
2. पॉलिसीधारकों की सुरक्षा और भारी जुर्माना
नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए बिल में दंडात्मक प्रावधानों को काफी सख्त बनाया गया है:
- जुर्माना: बीमा कंपनियों और मध्यस्थों (Intermediaries) पर अधिकतम जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दिया गया है।
- शिक्षा और संरक्षण फंड: जुर्माने से प्राप्त राशि का उपयोग एक नए फंड में किया जाएगा, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना होगा।
3. परिचालन सुगमता और नियामक सुधार
बीमा व्यवसाय को सरल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं:
- वन-टाइम रजिस्ट्रेशन: मध्यस्थों (Intermediaries) को अब बार-बार पंजीकरण नहीं कराना होगा; एक बार का रजिस्ट्रेशन सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करेगा।
- लाइसेंस सस्पेंशन: किसी उल्लंघन पर लाइसेंस सीधे रद्द करने के बजाय ‘सस्पेंड’ किया जाएगा, ताकि कंपनियों को अपनी कमियां सुधारने का मौका मिल सके।
- री-इंश्योरेंस में राहत: विदेशी री-इंश्योरेंस कंपनियों के लिए ‘नेट ओन्ड फंड’ की आवश्यकता ₹5,000 करोड़ से घटाकर ₹1,000 करोड़ कर दी गई है, जिससे भारत में अधिक पुनरबीमा कंपनियां आ सकेंगी।
4. LIC को अधिक स्वायत्तता
सरकारी बीमा दिग्गज LIC के लिए भी इस बिल में विशेष प्रावधान हैं:
- जोनल ऑफिस: अब LIC को नए जोनल ऑफिस खोलने के लिए अधिक प्रशासनिक स्वतंत्रता होगी।
- विदेशी संचालन: LIC अपने विदेशी कार्यालयों को संबंधित देशों के स्थानीय कानूनों के अनुसार संचालित कर सकेगी, जिससे वैश्विक बाजार में इसकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
तुलनात्मक चार्ट: पहले बनाम अब
| विशेषता | पुराना कानून (2010/2021) | नया बिल (2025) |
| FDI सीमा | 74% | 100% |
| अधिकतम जुर्माना | ₹1 करोड़ | ₹10 करोड़ |
| री-इंश्योरेंस फंड जरूरत | ₹5,000 करोड़ | ₹1,000 करोड़ |
| पंजीकरण प्रक्रिया | नवीनीकरण की आवश्यकता | एक बार का पंजीकरण |
निष्कर्ष: यह बिल “बीमा सबके लिए” के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक साहसिक कदम है। 100% FDI से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे प्रीमियम दरों में कमी आने और ग्राहकों को बेहतर विकल्प मिलने की संभावना है।


