भारत की पहली “लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल” का उड़ान परीक्षण
भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 17 नवंबर, 2024 को 1500 किमी से अधिक की रेंज वाली अपनी पहली “लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल” (long-range hypersonic missile) का उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। यह उड़ान परीक्षण ओडिशा तट से दूर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया।
मिसाइल को भारतीय सशस्त्र बलों की सभी सेवाओं के लिए 1500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तक विभिन्न पेलोड ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इस मिसाइल को हैदराबाद स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल कॉम्प्लेक्स की प्रयोगशालाओं के साथ-साथ डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं और उद्योग भागीदारों द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोस्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV)
DRDO अपने हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोस्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) कार्यक्रम के तहत कुछ समय से हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल तकनीकों पर काम कर रहा है और जून 2019 और सितंबर 2020 में मैक 6 स्क्रैमजेट का सफलतापूर्वक परीक्षण किया।
इस परीक्षण ने स्क्रैमजेट इंजन तकनीक का प्रदर्शन किया, जो एक बड़ी सफलता थी।
स्क्रैमजेट इंजन
स्क्रैमजेट इंजन में, हवा सुपरसोनिक गति से इंजन के अंदर जाती है और हाइपरसोनिक गति से बाहर आती है। रैमजेट एक प्रकार का एयर ब्रीथिंग जेट इंजन है जो घूमने वाले कंप्रेसर के बिना दहन के लिए आगे की हवा को कम्प्रेस करने के लिए वाहन की आगे की गति का उपयोग करता है।
दहन कक्ष में ईंधन डाला जाता है जहाँ यह गर्म कंप्रेस्ड हवा के साथ मिल जाता है और प्रज्वलित होता है।
रैमजेट, मैक 3 (ध्वनि की गति से तीन गुना) के आसपास सुपरसोनिक गति पर सबसे अधिक कुशलता से काम करते हैं और मैक 6 की गति तक काम कर सकते हैं। हालांकि, जब वाहन हाइपरसोनिक गति तक पहुंच जाता है तो रैमजेट दक्षता कम होने लगती है।
स्क्रैमजेट इंजन रैमजेट इंजन का अपग्रेड है और यह कुशलता से हाइपरसोनिक गति से संचालित होता है और सुपरसोनिक दहन की अनुमति देता है। इसलिए इसे सुपरसोनिक दहन रैमजेट या स्क्रैमजेट के रूप में जाना जाता है।
हाइपरसोनिक और बैलिस्टिक मिसाइलें
हाइपरसोनिक वीपन्स अधिक गति से उड़ान के क्रम में भी अपना पथ और दिशा बदल सकते हैं। हाइपरसोनिक मिसाइल न्यूनतम मैक 5 (ध्वनि की गति से पाँच गुना) की गति से उड़ सकती हैं। बता दें कि ध्वनि की गति मैक 1 है, तथा मैक 1 और मैक 5 तक की गति सुपरसोनिक और मैक 5 से ऊपर की गति हाइपरसोनिक है।
बैलिस्टिक मिसाइलें, हालांकि बहुत तेज़ गति से यात्रा करती हैं, लेकिन एक निश्चित प्रक्षेपवक्र (ट्राजेक्टोरी) पर उड़ान भर्ती हैं। ये वायुमंडल से बाहर उड़ान भर्ती हैं और केवल हमले के निकट ही वायुमंडल में पुनः प्रवेश करती हैं।
वहीं हाइपरसोनिक मिसाइल मैक-5 से अधिक गति से वायुमंडल के भीतर उड़ान भरती हैं और बीच में ही अपना पथ और दिशा बदल सकती हैं। इससे उनका पता लगाना और इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल बना देता है। इसका मतलब है कि रडार और एयर डिफेन्स उन्हें तब तक नहीं पकड़ सकते जब तक कि वे बहुत करीब न हों।